UPSSSC PET Answer Key 6 Sep 2025 Morning Shift | UPSSSC PET Answer Key 2025

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निर्देश (प्र. सं. 60 से प्र. सं. 64) : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

दुःख की श्रेणी में प्रवृत्ति के विचार से करुणा का उल्टा क्रोध है । क्रोध जिसके प्रति उत्पन्न होता है उसकी हानि की चेष्टा की जाती है । करुणा जिसके प्रति उत्पन्न होती है उसकी भलाई का उद्योग किया जाता है । किसी पर प्रसन्न होकर भी लोग उसकी भलाई करते हैं । इस प्रकार पात्र की भलाई की उत्तेजना दुःख और आनन्द दोनों की श्रेणियों में रखी गई है । आनन्द की श्रेणी में ऐसा कोई शुद्ध मनोविकार नहीं है जो पात्र की हानि की उत्तेजना करे, पर दुःख की श्रेणी में ऐसा मनोविकार है जो पात्र की भलाई की उत्तेजना करता है । लोभ से, जिसे मैंने आनन्द की श्रेणी में रखा है, चाहे कभी कभी और व्यक्तियों या वस्तुओं को हानि पहुँच जाय पर जिसे जिस व्यक्ति या वस्तु का लोभ होगा, उसकी हानि वह कभी नहीं करेगा । लोभी महमूद ने सोमनाथ को तोड़ा; पर भीतर से जो जवाहरात निकले उनको खूब सँभालकर रखा । नूरजहाँ के रूप के लोभी जहाँगीर ने शेर अफगन को मरवाया पर नूरजहाँ को बड़े चैन से रखा ।

ऊपर कहा जा चुका है कि मनुष्य ज्यों ही समाज में प्रवेश करता है, उसके सुख और दुःख का बहुत-सा अंश दूसरों की क्रिया या अवस्था पर अवलम्बित हो जाता है और उसके मनोविकारों के प्रवाह तथा जीवन के विस्तार के लिए अधिक क्षेत्र हो जाता है । वह दूसरों के दुःख से दुखी और दूसरों के सुख से सुखी होने लगता है । अब देखना यह है कि दूसरों के दुःख से दुखी होने का नियम जितना व्यापक है क्या उतना ही दूसरों के सुख से सुखी होने का भी । किसी दुखी मनुष्य को सामने देख हम अपना दुखी होना तब तक के लिए बन्द नहीं रखते जब तक कि यह न मालूम हो जाय कि वह कौन है, कहाँ रहता है और कैसा है; यह और बात है कि यह जानकर कि जिसे पीड़ा पहुँच रही है उसने कोई भारी अपराध या अत्याचार किया है हमारी दया दूर या कम हो जाय । ऐसे अवसर पर हमारे ध्यान के सामने वह अपराध या अत्याचार आ जाता है और उस अपराधी या अत्याचारी का वर्तमान क्लेश हमारे क्रोध की तुष्टि का साधक हो जाता है ।

सारांश यह कि करुणा की प्राप्ति के लिए पात्र में दुःख के अतिरिक्त और किसी विशेषता की अपेक्षा नहीं ।

Q61. किसकी प्राप्ति के लिए पात्र में दुःख के अतिरिक्त और किसी विशेषता की अपेक्षा नहीं होती है?
(A) उत्तेजना
(B) करुणा
(C) उत्साह
(D) क्रोध
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q62. करुणा जिसके प्रति उत्पन्न होती है, उसके लिए क्या किया जाता है?
(A) क्रोध उसके प्रति उत्पन्न हो जाता है।
(B) चंचल हो जाते हैं।
(C) उसकी भलाई का उद्योग किया जाता है।
(D) उसकी हानि की चेष्टा की जाती है।
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q63. आनंद की श्रेणी में ऐसा कोई शुद्ध मनोविकार नहीं है जो पात्र की हानि की उत्तेजना करे, पर दुःख की श्रेणी में ऐसा मनोविकार है जो पात्र की _ की उत्तेजना करता है।
(A) बुराई
(B) सच्चाई
(C) भलाई
(D) भावना
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q64. दुःख की श्रेणी में प्रवृत्ति के विचार से करुणा का उल्टा क्या हो सकता है?
(A) क्रोध
(B) भाव
(C) श्रद्धा
(D) दुःख
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

निर्देश (प्र. सं. 65 से प्र. सं. 69) : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि इतने दिनों तक अंग्रेजों की अनुवर्तिता करने के बाद भी भारतवर्ष ‘इण्डिपेण्डेन्स’ को अनधीनता क्यों नहीं कह सका ? उसने अपनी आजादी के जितने भी नामकरण किये – स्वतन्त्रता, स्वराज्य, स्वाधीनता – उन सब में ‘स्व’ का बन्धन अवश्य रखा । यह क्या संयोग की बात है या हमारी समूची परम्परा ही अनजान में, हमारी भाषा के द्वारा प्रकट होती रही है ? मुझे प्राणि-विज्ञानी की बात फिर याद आती है – सहजात वृत्ति अनजानी स्मृतियों का ही नाम है । स्वराज होने के बाद स्वभावतः ही हमारे नेता और विचारशील नागरिक सोचने लगे हैं कि इस देश को सच्चे अर्थ में सुखी कैसे बनाया जाय । हमारे देश के लोग पहली बार यह सब सोचने लगे हों, ऐसी बात नहीं है । हमारा इतिहास बहुत पुराना है, हमारे शास्त्रों में इस समस्या को नाना भावों और नाना पहलुओं से विचारा गया है । हम कोई नौसिखुए नहीं हैं, जो रातों-रात अनजान जंगल में पहुँचाकर अरक्षित छोड़ दिये गये हों । हमारी परम्परा महिमामयी, उत्तराधिकार विपुल और संस्कार उज्ज्वल हैं । हमारे अनजान में भी ये बातें हमें एक खास दिशा में सोचने की प्रेरणा देती हैं । यह जरूर है कि परिस्थितियाँ बदल गयी हैं । उपकरण नये हो गये हैं और उलझनों की माया भी बहुत बढ़ गयी है, पर मूल समस्याएँ बहुत अधिक नहीं बदली हैं । भारतीय चित्त जो आज भी ‘अनधीनता’ के रूप में न सोचकर ‘स्वाधीनता’ के रूप में सोचता है, वह हमारे दीर्घकालीन संस्कारों का फल है । वह ‘स्व’ के बन्धन को आसानी से नहीं छोड़ सकता । अपने-आप पर अपने-आप के द्वारा लगाया हुआ बन्धन हमारी संस्कृति की बड़ी भारी विशेषता है । मैं ऐसा तो नहीं मानता कि जो कुछ हमारा पुराना है, जो कुछ हमारा विशेष है, उससे हम चिपटे ही रहें । पुराने का ‘मोह’ सब समय वाञ्छनीय ही नहीं होता । मेरे बच्चे को गोद में दबाये रहनेवाली ‘बँदरिया’ मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती । परन्तु मैं ऐसा भी नहीं सोच सकता कि हम नयी अनुसन्धित्सा के नशे में चूर होकर अपना सरबस खो दें । कालिदास ने कहा था कि सब पुराने अच्छे ही नहीं होते, सब नये खराब ही नहीं होते ।

Q65. मनुष्य ने अपनी आजादी के जितने भी नामकरण किये स्वतंत्रता, स्वराज्य, स्वाधीनता-उन सब में _ का बंधन अवश्य रखा।
(A) ओर
(B) श्वर
(C) स्व
(D) पर
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q66. मरे बच्चे को गोद में दबाये रहनेवाली _ मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती।
(A) बंदरिया
(B) सुअर
(C) भेड़िया
(D) बाघिन
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q67. लेखकजी को प्राणि-विज्ञानियों की कौन-सी बात याद आती है?
(A) नाना भावों और नाना पहलुओं से विचारा गया है।
(B) सहजात वृत्ति अनजानी स्मृतियों का ही नाम है।
(C) नाखून बढ़ना उनमें से एक हो सकता है।
(D) हम कोई नौसिखुए नहीं है।
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q68. लेखकजी कभी-कभी क्या सोचने लगते हैं?
(A) यह हमारी पशुता के अवशेष है।
(B) ये हमारी पशुता की निशानी है।
(C) पशुता या मनुष्यता की ओर।
(D) अंग्रेजों की अनुवर्तिता करने के बाद भी भारतवर्ष ‘इण्डिपेण्डेन्स’ को अनधीनता क्यों नहीं कह सका?
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q69. कालिदास ने क्या कहा था?
(A) पुराने का मोह सब समय वाञ्छनीय ही नहीं होता।
(B) हमारी परंपरा महिमामयी, उत्तराधिकार विपुल और संस्कार उज्ज्वल है।
(C) उलझनों की मात्रा बहुत बढ़ गई है।
(D) सब पुराने अच्छे ही नहीं होते, सब नये खराब ही नहीं होते।
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q70. ‘आदान’ का विलोम शब्द _ है।
(A) आचार
(B) प्रदान
(C) अभिमान
(D) अनुग्रह
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q71. जो विशेषण अपने विशेष्य की मात्रा या परिमाण के विषय में ज्ञान कराएँ, उसे _ विशेषण कहते हैं।
(A) सार्वनामिक
(B) संख्यावाचक
(C) परिमाणवाचक
(D) गुणवाचक
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q72. ‘आँखें दिखाना’ मुहावरे का सही अर्थ है
(A) अपनी हानि स्वयं करना
(B) धोखा देना
(C) अनदेखा करना
(D) गुस्से में देखना
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q73. ‘समय की पहचान’ सियारामशरण गुप्त जी की कविता है, जिसमें वे _ के महत्व के बारे में बताते हैं।
(A) विश्वास
(B) धन
(C) परिश्रम
(D) समय
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q74. ‘चैत’ तद्भव शब्द है, उसका तत्सम शब्द _ है।
(A) चैत्र
(B) चित्र
(C) चित्त
(D) चंद्र
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q75. _ बाह्य एवं आंतरिक आपातकाल के दौरान लागू होता है।
(A) अनुच्छेद 338
(B) अनुच्छेद 348
(C) अनुच्छेद 359
(D) अनुच्छेद 358
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q76. DTM के किस चरण में सबसे तेज़ जनसंख्या वृद्धि देखी जाती है?
(A) चरण 5
(B) चरण 3
(C) चरण 2
(D) चरण 1
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q77. यदि 1 जनवरी, 2001 को सोमवार था, तो 31 दिसंबर, 2001 को सप्ताह का कौन-सा दिन था?
(A) शनिवार
(B) सोमवार
(C) शुक्रवार
(D) बुधवार
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q78. किस औद्योगिक नीति प्रस्ताव ने सार्वजनिक क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था में एक रणनीतिक भूमिका प्रदान की?
(A) औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956
(B) औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1952
(C) औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1950
(D) औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1948
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q79. एक पुरुष का परिचय देते हुए, एक महिला ने कहा “उसकी माँ मेरे पिता की इकलौती बेटी है।” पुरुष का महिला से क्या संबंध है?
(A) चाचा
(B) भाई
(C) पिता
(D) बेटा
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Q80. निम्न भूजल भंडारण से किस प्रकार की चट्टान संरचना सबसे अधिक जुड़ी हुई है?
(A) चूना पत्थर संरचनाएँ
(B) आग्नेय और कायांतरित चट्टानें
(C) अवसादी चट्टानें
(D) जलोढ़ निक्षेप
(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

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